Thursday, May 06, 2021

दोहा

सुनकर कोकिल की कुहुक, भ्रमरों का मधुगीत।
मन पहुँचा देता वहाँ, जहाँ पुराने मीत।।

-सुनीता यादव

3 comments:

डॉ0 मंजू यादव said...

बहुत सुंदर

Anonymous said...

धन्यवाद मंजू जी 🙏

Anonymous said...

धन्यवाद मंजू जी ��