कविता की पाठशाला
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हिंदी की सौ सर्वश्रेष्ठ प्रेम कविताएँ
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व्योम के पार
कविता की पाठशाला
माहिया
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*मौसम
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Wednesday, July 21, 2021
दोहा
मौसम बदले करवटें, ऋतु ने बदली धार ।
बूँदों की ले पालकी, आये मेघकुमार ।।
-आभा खरे
Wednesday, June 23, 2021
सर्दी का रात
सर्दी का रात
नानी की कहानियाँ
मीठी गजक
-अनूप भार्गव
शीत दुशाला
शीत दुशाला
देहरी पे सूरज
तुम आये थे
-अनूप भार्गव
Tuesday, June 22, 2021
माहिया
रुत सावन की आयी
बागों में झूले
हरियाली मन भायी
-विद्या चौहान
Monday, June 21, 2021
माहिया
रिमझिम बरखा आई
बादल बोल रहे
धरती की कुड़माई
-शर्मिला चौहान
माहिया
कारी बदरी छाई
बिजुरी की बोली
बरखा की अगुवाई
-सुधा राठौर
माहिया
बूँदों की रवानी है
सावन की तो बस
इक ये ही कहानी है
-डा० अर्चना पाण्डेय
Tuesday, June 08, 2021
दोहा
धूप सयानी हो गयी, बचपन में ही खूब।
गर्मी की देखो हनक, सूखी जाये दूब।।
-सुरंगमा यादव
Sunday, June 06, 2021
दोहा
बदहवास होती हवा, मेघ दिखाते पीठ.
जेठ दुपहरी जल रही, हुये बवंडर ढीठ.
-योगेन्द्र वर्मा
दोहा
गरमी हो या लू चले, आँधी या तूफान.
अपने पथ से मत डिगो, मंज़िल हो आसान.
-अरुन शर्मा
अमेरिका
Thursday, June 03, 2021
दोहा
मेघ चले बारात ले, घन के ढोल सँवार
तरु पल्लव सब झूमते, बहती सुखद बयार।
-सोनम यादव
Sunday, May 30, 2021
दोहा
धूप बावरी हो गयी,पाके लू का संग।
‘जेठ’सयाने पहुँचते,गोरीं ढाँकें अंग।
-आर बी अग्रवाल
Thursday, May 27, 2021
दोहा
जेठ पाहुने आ गए, धूप जिठानी संग,
छाया परदे से तके, लू ननदी हुड़दंग।
-अमित खरे
Saturday, November 28, 2020
जेठ के दिन
जेठ के दिन
घूम रही हवाएँ
सूरज लादे
-आभा खरे
Wednesday, November 25, 2020
सोनम यादव
तीजों का त्यौहार है, छिडी जगत में जंग
गोरी मन में है दुखी, हाथ बडा है तंग
हाथ बडा है तंग, माल बाजार बंद सब
कैसे हो त्यौहार, घिरे आफत में अब सब
मन को करो उदास, भले झगड़ो या खीजो
सखियों के मन रंज, चली जाओ तुम तीजों
-सोनम यादव
कुंडलिया
दावानल से जूझता,काला हुआ वितान
विगत फैली हरियाली,देखो बना श्मशान
देखो बना श्मशान, जलती संपदा सारी
जूझ रहा हर जीव,मची है हाहाकारी
कारण मानव स्वार्थ,या प्रकृति का हालाहल
है अगन अभी प्रखर, कैसे बुझे दावानल
-अचला झा
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