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Monday, June 28, 2021

माहिया

धरती की सुनती हैं
बरखा की बूँदें
हरियाली बुनती हैं

-योगेन्द्र वर्मा

Sunday, June 06, 2021

दोहा

बदहवास होती हवा, मेघ दिखाते पीठ.
जेठ दुपहरी जल रही, हुये बवंडर ढीठ.

-योगेन्द्र वर्मा

Tuesday, May 04, 2021

दोहा

तुलसी का चौरा हुआ, बियाबान वीरान.
गौरैया जब से हुई, घर से अंतर्ध्यान.

-योगेन्द्र वर्मा

Wednesday, November 25, 2020

योगेन्द्र वर्मा

देखी तेरी हैसियत, देखी तेरी शान
माटी में ही जा मिला,.माटी का इन्सान
माटी का इन्सान,मौत जी भर के हँसती
होगा बड़ा मकान, देह मटकी में रहती
बन सच्चा इंसानन,बघारे क्यों तू शेखी
छोड़ अहम् अभिमान,करे क्यों देखा देखी

-योगेन्द्र वर्मा