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Thursday, May 25, 2023

अंबर रस बरसाता

अंबर रस बरसाता
धरती का आंचल
मोती से भर जाता

-जयंती कुमारी

घन घुमड़ घुमड़ आएँ

घन घुमड़-घुमड़ आएँ
झूला झूलन को
परदेशी घर जाएँ

-जयंती कुमारी

Monday, June 21, 2021

माहिया

बादल घहराते हैं
कजरी की धुन पर
बूंदें बरसाते हैं

-जयंती कुमारी

Wednesday, May 19, 2021

दोहा

ज्ञानी चिड़िया टिटहरी, जाने ऋतु का हाल।
बैठे जब ये पेड़ पर, आए तब भूचाल।।

-जयंती कुमारी

Wednesday, May 12, 2021

दोहा

कोयल क्यूँ निर्मम बने, क्या है इसमें भेद।
फोड़े अंडा काक का, निष्ठुर करे न खेद।।

-जयंती कुमारी

Friday, May 07, 2021

दोहा

ललमुनियाँ सुन्दर चिड़ा, रहे जलाशय तीर।
रंग बदलता चोंच का, गोल बनाता नीड़।।

-जयंती कुमारी

दोहा

सींगों जैसी चोंच से, खींचे ध्यान धनेश।
लालच वश मारा गया, अक्सर विहग विशेष।।

-जयंती कुमारी

Wednesday, May 05, 2021

दोहा

हरियल शर्मीला विहग, महाराष्ट्र सिरमौर।
पग धरती पर ना धरे, बरगद पीपल ठौर।।

-जयंती कुमारी

Monday, May 03, 2021

दोहा

हजरत का जासूस ये, इजरायल की शान।
कँलगी सर पर शोभती, हुदहुद इसका नाम।।

-जयंती कुमारी

दोहा

धोखेबाजी में निपुण, रहे ध्यान में लीन।
छद्म भगत बगुला बने, खाए चुन चुन मीन।।

-जयंती कुमारी

Wednesday, November 25, 2020

जयंती कुमारी

 प्यारा मेरा गांव है, चतरा जिसका नाम
जन्मभूमि पावन बड़ा, हरा भरा अभिराम
हरा भरा अभिराम,लोग मिलजुल कर रहते
जाति धर्म से परे, सुख दुख बांट के सहते
पान मखान प्रधान, गांव ये जग से न्यारा
मिथिला का यह क्षेत्र, मुझको प्राण से प्यारा

-जयंती कुमारी