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Saturday, December 31, 2022

मन का पाखी

मन का पाखी नभ उड़ा, गाता गीत हज़ार.
सोन चिरैया ढूँढ़ती, बातें बारम्बार.

-सुरेश चौधरी

Sunday, May 09, 2021

दोहा


माँ मुट्ठी भर धूप ले, करती नित नव भोर
भाग चला डर से तिमिर, उठा पूर्व से शोर।

-सुरेश चौधरी 

Wednesday, May 05, 2021

दोहा

मन तो पक्षी आपका, लम्बी भरे उड़ान.
जाल फेंक कर मोह का, खींचे इंदु वितान.

-सुरेश चौधरी