कविता की पाठशाला
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हिंदी की सौ सर्वश्रेष्ठ प्रेम कविताएँ
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व्योम के पार
कविता की पाठशाला
माहिया
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आलोक मिश्रा
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Wednesday, June 23, 2021
माहिया
पेड़ों की बातों को
कोई तो समझे
उनके जज़्बातों को
-आलोक मिश्रा
Tuesday, June 22, 2021
माहिया
कलियाँ मुस्काती हैं
देख के भँवरे को
खुद पे इतराती हैं
-आलोक मिश्रा
माहिया
पेड़ों की बातों को
कोई तो समझे
उनके जज़्बातों को
-आलोक मिश्रा
Friday, June 04, 2021
दोहा
लकड़ी तो है एक ही, भिन्न मगर व्यवहार
सीना ताने धनु खड़ा, शीश झुकाए डार ।
-आलोक मिश्रा
Thursday, May 06, 2021
हाइकु
फ़ोटो खींच लूँ
कैमरा सेट किया
चिड़िया फुर्र
-आलोक मिश्रा
Tuesday, May 04, 2021
दोहा
बने-ठने सब पेड़ हैं, आया है मधुमास।
डाली-डाली फिर रही, कोयल करती रास।।
-आलोक मिश्रा
Monday, May 03, 2021
दोहा
चिड़िया दाना चोंच रख, फैलाती चहुँ ओर।
डालो दाना प्रेम का, प्रीति बढ़े सब ओर।।
-आलोक मिश्रा
Wednesday, November 25, 2020
आलोक मिश्रा
सरकारी हो नौकरी, सबके मन की चाह
काम-काज हो तनिक सा, मिले अधिक तनख्वाह
मिले अधिक तनख्वाह, मौज में बीते हर दिन
चाय-पान के दौर, काम की ना हो टेंशन
कहते कवि आलोक, नौकरी से हो यारी
तन्मयता से करें, प्राइवेट या सरकारी।
-आलोक मिश्रा
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