बीत गया जो वर्ष,विदा देने की वेला आयी
नये वर्ष के स्वागत की अब बजने लगी बधाई।
क्या खोया क्या पाया इसका लिखने बैठी खाता
हर इक पल जो जैसा बीता याद हू-ब-हू आता,
शिकवे और शिकायत, रोना-हँसना, रिश्ता-नाता
कब क्या हुआ आज है जैसे वर्ष स्वयं बतलाता,
सुधि के मनकों को सहेज रखने की बेला आई
नये वर्ष के स्वागत की अब बजने लगी बधाई।
छोटे-छोटे यत्न जिन्होंने मन को दिया सहारा
खिली धूप के उन दिवसों में जब मन था अँधियारा,
कहने को जो अपने थे उन सबने किया किनारा
किसे बुलाती तुम्हे छोड़ कर मित्र तुम्हे ही पुकारा,
नेह-प्रेम के प्रति कृतज्ञता से आँखें भर आयीं
नये वर्ष के स्वागत की अब बजने लगी बधाई।
नये वर्ष में नये स्वप्न हों अंतर्मन में जोश नया
अभिलाषा के नव परिमल से परिपूरित परिवेश नया,
संकल्पों के नव किसलय हों सच्चे हों संबंध सदा
धीरज की सरिताओं के तट हों अटूट तटबंध सदा
खुशियों के अनुबंध आज लिखने की बेला आयी
नये वर्ष के स्वागत की अब बजने लगी बधाई।
-मीनू खरे
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