Wednesday, November 25, 2020

सुधा राठौर


पावन  यह  एकादशी, कार्तिक  का त्योहार।
प्रभु लेंगे अब  सृष्टि का, शैय्या तजकर भार।।
शैय्या  तजकर  भार, विराजित हैं निज धाम।
रचा रहे हैं ब्याह ,  वृंदा से  शालिग्राम।।
'सुधा' विष्णु के रूप, सभी हैं दुख सरसावन।
चार  महीने बाद, आ गये  फिर दिन  पावन।।

-सुधा राठौर

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