पावन यह एकादशी, कार्तिक का त्योहार।
प्रभु लेंगे अब सृष्टि का, शैय्या तजकर भार।।
शैय्या तजकर भार, विराजित हैं निज धाम।
रचा रहे हैं ब्याह , वृंदा से शालिग्राम।।
'सुधा' विष्णु के रूप, सभी हैं दुख सरसावन।
चार महीने बाद, आ गये फिर दिन पावन।।
-सुधा राठौर
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